गुरुवार, 9 नवंबर 2017

आज बड़ी-बड़ी मशीनरियों से
दर्जनों नवजात पौधे कुचल गए
बड़ा दुख हुआ यह देखकर इन
मासूमों पर मशीन के पांव कैसे चल गए
कुछ पौधे बीमार हो गए थे
छोटे पौधों में भी दीमक लग रहे थे
मशीनें दीमकों को कुचले पौधे भी गए
बेचारे कलप रहे थे

दीमक न लगे बागवानी में इसलिए
मशीनें छिड़काव करने आयी थी
बागवान को नहीं पता था शिशुओं के
दिलों में घाव करने आयी थी
दीमकों हेतु आयी मशीनें कुचल दी
प्राण जब निकलने लगा चौथे खंभे ने बताया
मशीनें दीमक मारने आयी थी क्योंकि
पौधों की जड़ों में दीमक लग रहे थे

डिसक्लेमर :- ये पोस्ट पूर्णतया कॉपीराइट प्रोटेक्टेड है, ये किसी भी अन्य लेख या बौद्धिक संम्पति की नकल नहीं है। इस पोस्ट या इसका कोई भी भाग बिना लेखक की लिखित अनुमति के नकल, चित्र रूप या इलेक्ट्रॉनिक रूप में प्रयोग करने का अधिकार किसी को नहीं है, अगर ऐसा किया जाता है निर्धारित क़ानूनों के तहत कार्रवाई की जाएगी।
©प्रवीन यश #यश #प्रवीन_यश
हरहुआ, वाराणसी
9450112497


रविवार, 13 अगस्त 2017

चंद रुपयों के खातिर ईमान बेचने वाले बहुत हैं
राजनीति के नाम पर गीता-कुरान बेचने वाले बहुत हैं।
मर गए गोरखपुर में दर्जनों बच्चे बिना ऑक्सीजन के
घर में ही नंगा हो गए साहब इंसान देखने वाले बहुत हैं।।

गलती इसकी है या उसकी है शोर मंत्रालय में मचा है
सब डैकत भ्रष्टाचारी हैं सच्चा कौन मंत्रालय में बचा है
कहते हो यह सुशासन है शर्म करो साहब, तेरे लोग ही
तेरे सुशासन को खुले आम बेचने वाले बहुत हैं।
राजनीति के नाम पर गीता-कुरान बेचने वाले बहुत हैं।।


गुरुवार, 10 अगस्त 2017

सुनो जी एक माँ मर गयी
उनकी अस्थियां गल गयी।।
उसका बेटा एनआरआई था
जिसका लाखों रुपए कमाई था।।

अफसोस कि मां के मरने पर
बेटे को पता नही चला होगा।
मां प्राण त्यागी होगी ये सोचकर
बेटा विदेश में अच्छा भला होगा।।

मेरे मौत की खबर सुनकर
मेरा बेटा जहाज से आ जायेगा।
मेरे शरीर से लिपट कर झकझोरेगा
बिलखेगा रोएगा खूब पछतायेगा।।

लेकिन उस मां को क्या पता था
मेरा बेटा डेढ़ बरस बाद आएगा।
गली हुई हड्डियां और मेरे कंकाल देख
मुझे छुएगा भी नहीं बाहर भाग जाएगा।।

यह उसी मां का बदन है जिससे
वर्षों तक लिपटकर दूध पीते रहे।।
यह उसी मां का गर्भ है
जिसमें नौ माह तक जीते रहे।।

याद करो उस मां के स्तन का हर
एक बून्द दूध भी निचोड़ लेते थे।
मां कुछ खाने जाती तो झट से
उसके हाथों से छोड़ लेते थे।।

सोचो उस मां का खून जब
पानी सा हो गया होगा।
तेरे लिए रोई छटपटाई होगी
उसका आत्मा भी रो गया होगा।।

जब मां बोली अब बात न करना
तब वापस तुम तो आ सकते थे।
अपने परिचित या रिश्तेदार को
यह बात बता तो सकते थे।।

अमेरिका से मुम्बई पुलिस को
फोन कर वहां भेज दिया।
तुम नहीं आने की सोचे और
बस पुलिस को सहेज दिया।।

वाह रे दुनियां के मालिक कब
तुमने क्या सोचा था।
बड़की बिल्डिंग वाले अंधे
तुमको किसने रोका था।।

यश मानव तो जिंदा हैं पर
मानवता मरती रोज यहाँ।
जो तुझे उठाकर दफन हुए
वो लगते हैं तुम्हें बोझ यहाँ।।

डिसक्लेमर :- ये पोस्ट पूर्णतया कॉपीराइट प्रोटेक्टेड है, ये किसी भी अन्य लेख या बौद्धिक संम्पति की नकल नहीं है। इस पोस्ट या इसका कोई भी भाग बिना लेखक की लिखित अनुमति के नकल, चित्र रूप या इलेक्ट्रॉनिक रूप में प्रयोग करने का अधिकार किसी को नहीं है, अगर ऐसा किया जाता है निर्धारित क़ानूनों के तहत कार्रवाई की जाएगी।
©प्रवीन यश #यश #प्रवीन_यश
हरहुआ, वाराणसी
9450112497


बुधवार, 9 अगस्त 2017

कभी चढ़ जाती पेड़ पर
कभी झूल जाती डाल पर।
कभी आ जाती आंगन में
कभी चढ़ जाती दीवाल पर।।

एक दिन की बात है जब वो
पेड़ से उतरकर नीचे आ गयी।
घर में लगी फुलवारी में
खुद खींचे-खींचे आ गयी।।

पास में घूम रहे आवारा कुत्तों
की निगाह उस पड़ गयी।
कुत्ते झट से उसे दबोचने दौड़े
जिससे बेचारी डर गयी।।

उसको अपनी जान बचाना
लग रहा था बहुत भारी।
डरी रोयी कोई न सुना
कोई न सुना लचारी।।

हिम्मत कर एक कमरे में
वो भाग गयी छुपने को।
देर भले कोई आएगा
मेरा हाल पूछने को।।

मुंह बाये हुए दरिंदे
कुत्ते उसे खोज रहे थे।
उससे प्यास मिटायेंगे वो
मन ही मन ये सोच रहे थे।।

डरी गिलहरी देखते मालिक
कुत्तों को मारने दौड़े हैं।
कुत्ते बोले सत्ता मेरी है
सीने हैं मेरे चौड़े हैं।।

पूछो इस गिलहरी से तुम
धरती पर क्यों आती है।
उछल कुद करती क्यों इतनी
क्यों इतना इतराती है।।

सत्ता मेरी है तुम मेरा
कुछ नहीं कर पाओगे।
हम रोज गिलहरियों पर टूटेंगे
तुम कितने को बचाओगे।।

बोल दो अपनी इज्जत प्यारी
है इन गिलहरियों को।
धरती पर ना रखें कदम ये
तोड़ें भले टहनियों को।।

तब तक यह सारी बातें
हर जंगल वन पहुच गयी।
सभी गिलहरी न्याय मांगने
राजा के घर पहुच गयी।।

राजा गूंगा बहरा बन गया
कुत्तों को उसने ही पाला था।
अपने प्रजा की फिक्र न उसको
उसका मुँह खुद काला था।।

बात बात पर ट्वीट कर देता
सच्चा राजा बनने को।
डरी गिलहरी न्याय मांगती
नहीं बचा कुछ कहने को।।

तू जनता का "यश" है
तू जनता का भगवान है।
न्याय दे दो गिलहरी को
उसके अंदर भी तो जान है।।

डिसक्लेमर :- ये पोस्ट पूर्णतया कॉपीराइट प्रोटेक्टेड है, ये किसी भी अन्य लेख या बौद्धिक संम्पति की नकल नहीं है। इस पोस्ट या इसका कोई भी भाग बिना लेखक की लिखित अनुमति के शेयर, नकल, चित्र रूप या इलेक्ट्रॉनिक रूप में प्रयोग करने का अधिकार किसी को नहीं है, अगर ऐसा किया जाता है निर्धारित क़ानूनों के तहत कार्रवाई की जाएगी।

©प्रवीन यश #यश #प्रवीन_यश
हरहुआ, वाराणसी
9450112497


शनिवार, 5 अगस्त 2017

आप हैं तब इस जहां में हम हैं
आप नहीं हैं तो मुझमें क्या दम है।
आप साथ हैं तो दुनियां जीतेंगे
आप नहीं हैं तो यश बेदम है।।

डिसक्लेमर :- ये पोस्ट पूर्णतया कॉपीराइट प्रोटेक्टेड है, ये किसी भी अन्य लेख या बौद्धिक संम्पति की नकल नहीं है। इस पोस्ट या इसका कोई भी भाग बिना लेखक की लिखित अनुमति के शेयर, नकल, चित्र रूप या इलेक्ट्रॉनिक रूप में प्रयोग करने का अधिकार किसी को नहीं है, अगर ऐसा किया जाता है निर्धारित क़ानूनों के तहत कार्रवाई की जाएगी।
©प्रवीन यश #यश #प्रवीन_यश


शुक्रवार, 4 अगस्त 2017

गजब हुआ जब सोई चाची
सपने में थी खोई चाची
बाल हाथ में लेकर कोई
सहलाया खुश होई चाची
कोई काट गया चोटी तब
उठते ही खूब रोइ चाची
गजब हुआ जब सोई चाची.....

पता चला जब चच्चा को तब
गुस्से से वो लाल हो गए
अगल-बगल सबको चिल्लाए
बोले हम कंगाल हो गए
रोज शैम्पू तेल लगा-लगा के
चोटिया थी संजोई चाची
गजब हुआ जब सोई चाची....

बड़ी कीमती थी चोटी वो
बड़ा जतन से बढ़ाई थी
उसकी साजो सज्जा में ही
लग गयी मेरी कमाई थी
चाची को दौरा आ जाता
सोच के दिल घबरा जाता
कलियें थी चोटी धोई चाची
गजब हुआ जब सोई चाची.......

पहुच गए तब नेता गायक
बोले मेरी बात नहीं मानी
नेबुआ मिर्ची लटका लेती
होती ना ऐसा मनमानी
वाह अनुभवी गायक साहब
पहिले ही आप बताये थे
खुलल केश गज्झिन में नजर लगी
तब एगो नेबुआ मिर्ची गाये थे
सोचे #यश बइठ देवढीया पर
कैइसे अब का होइ चाची
गजब हुआ जब सोई चाची

कट गई चोटी रोइ चाची

डिसक्लेमर :- ये पोस्ट पूर्णतया कॉपीराइट प्रोटेक्टेड है, ये किसी भी अन्य लेख या बौद्धिक संम्पति की नकल नहीं है। इस पोस्ट या इसका कोई भी भाग बिना लेखक की लिखित अनुमति के शेयर, नकल, चित्र रूप या इलेक्ट्रॉनिक रूप में प्रयोग करने का अधिकार किसी को नहीं है, अगर ऐसा किया जाता है निर्धारित क़ानूनों के तहत कार्रवाई की जाएगी।
©प्रवीन यश #यश #प्रवीन_यश
हरहुआ, वाराणसी

नोट:- सुनिए जी इस कविता का किसी से कुछ भी कोई या किसी प्रकार का सम्बन्ध नहीं है।


गजब  का माहौल बन गया आज अपने देश में
चोटी कटवा घूम रहा है ना जाने किस भेष में
चर्चा बड़ी-बड़ी चल रही गांव और शहरिया में
शोर मचा है चोटी कटवा आता है अन्हरिया में
काट के चोटी गायब होता कोई देख न पाता है
और नहीं कुछ चोटी काटे, चोटी से क्या नाता है
कोई कहे अफवाह मात्र है कोई कहता सही है घटना
कोई कहे ये अच्छे दिन हैं मां बहनों तुम इनसे बचना
यश क्या बोले समझ न आवे ऐसा कैसे हो रहा है
चोटी कटवा आ गया तो मुँहनोचवा कहाँ सो रहा है
©प्रवीन यश
हरहुआ, वाराणसी


बुधवार, 2 अगस्त 2017

जापान के क्योटो शहर के जैसे काशी को बनवा देंगे
पीएम साहब, बोल दिए हैं कि बुलेट ट्रेन चलवा देंगे।।
गजब के वादे गजब के दावे आज के राजनेताओं के
जिनको रोटी नहीं नसीब उनको पैखाने में निपटा देंगे।।


सोमवार, 31 जुलाई 2017


मैं तेरे दिल में बसता था तेरे ही दिल में रहता हूं।
तुम्हें सुनाई देता है क्या जो मैं लिखता कहता हूं।।
तुम खुश हो या रोती हो यह मुझे बता दो एक दफा
क्या अभी मोहब्बत है जिंदा या भूल गयी सब प्यार वफा
क्या अब भी हिचकी आती है जब याद तुझे मैं करता हूं।
तुम्हें सुनाई देता है क्या जो मैं लिखता कहता हूं।।

वह दिन भी बड़े सुहाने थे कल जब तुम पढ़ने आती थी
जब मुझे नहीं कुछ आता था तुम बहुत मुझे समझाती थी
मैं कल बुद्धू जैसा था पर आज बहुत कुछ समझा हूं।
तुम्हें सुनाई देता है क्या जो मैं लिखता कहता हूं।।

कहीं मम्मी पापा ना समझें तुम प्यार को बड़ा छुपाती थी
घर मुझे सहेली बता बता दिन रात बहुत बतियाती थी
अब प्रेम छुपाती हो कैसे अब भी तेरी बातें करता हूं।
तुम्हें सुनाई देता है क्या जो मैं लिखता कहता हूं।।

है अगर शिकायत कोई तो एक बार बताने आ जाना
दुनियां की चिंता छोड़ के बस तुम प्यार निभाने आ जाना
सुन लो तेरी हर चिट्ठी को यश आज भी पढ़ता रहता हूं।
तुम्हें सुनाई देता है क्या जो मैं लिखता कहता हूं।।

©प्रवीन यश
हरहुआ, वाराणसी
9450112497



शुक्रवार, 28 जुलाई 2017

कुछ नेता बनके लूट रहे कुछ पत्रकार बनके।
कुछ लूट के बैठ विपक्ष में तो कुछ सरकार बनके।।
कौन कहता है कि भारत आजाद हो गया है
देश के सिर फिर विश्वगुरु का ताज हो रहा है
कुछ भाषण देकर लूट रहे कुछ परचार करके।
कुछ नेता बनके लूट रहे कुछ पत्रकार बनके।।

बच्चों को पढ़ाने के लिए बाप खेत बेच रहा
पढ़-लिखकर अव्वल हो बच्चा गोबर फेंक रहा
घूस सीना ताने खड़ा नौकरी में दीवार बनके।
कुछ नेता बनके लूट रहे कुछ पत्रकार बनके।।

दर-डर भटक रहा युवा कोई काम तो बताओ
जैसे आप कमा रहे हो वैसे मुझे भी कमवाओ
बस खर्चा निकालता रहूं एक आधार बनके।
कुछ नेता बनके लूट रहे कुछ पत्रकार बनके।।

और भी दुर्दिन देखोगे तुमने सरकार बनाया था
आईटी करके तुमने ही चुनावी कैम्पेन चलाया था
एमए पास ढो रहे हैं अढिया बेरोजगार बनके।
कुछ नेता बनके लूट रहे कुछ पत्रकार बनके।।

यश तूँ भी चल अब कोई रास्ता तलाश कर
ऐसे अकेले बैठकर ना खुद को निराश कर
लोग पढ़ते हैं तेरी कविता बड़े लाचार बनके।
कुछ नेता बनके लूट रहे कुछ पत्रकार बनके।।

©प्रवीन यश
हरहुआ, वाराणसी
9450112497


सोमवार, 24 जुलाई 2017

उनके चेहरे पे खुशियां सलामत रहे
उनकी हरपल हँसी में कयामत रहे
उनके जीवन में हमसा हजारों मिलें
जिनके दिल में समायी सी चाहत रहे......
हम मिलें ना मिले कोई गम भी नहीं
जितना हम मिल गए हैं वो कम भी नहीं
अब भले ही मोहब्बत वो ना है बची
जो बची है वही बस सलामत रहे
उनकी हर पल हंसी में कयामत रहे......
उनको वो सब मिले जो मुझे ना मिला
फूल वो भी खिले जो यहाँ ना खिला
उमर भर उनका दामन महकता रहे
कांटों से उनका आँचल सलामत रहे
उनकी हर पल हंसी में कयामत रहे......
यश तो उनकी हरपल भलाई सुना
उनके जीवन में रिश्तों का ताना बुना
आधी उमर पत्थरों सी रही उनकी
आधी में सोने चांदी की आदत रहे
उनकी हर पल हंसी में कयामत रहे...... हे ईश्वर उनके चेहरे पे खुशियां सलामत रहे
©प्रवीन यश
हरहुआ, वाराणसी
9450112497


जिनकी बन्द होती हैं आंखें...उनके पास सपने होते हैं।

खुली रहे आंखें जिनकी.......उनके तो अपने-अपने होते हैं।

©प्रवीन यश


जिनकी बन्द होती हैं आंखें...उनके पास सपने होते हैं।

खुली रहे आंखें जिनकी.......उनके तो अपने-अपने होते हैं।

©प्रवीन यश


रविवार, 23 जुलाई 2017

गम की राहों से मेरी अर्थी निकल रही थी
तूफान की लहरों पर सच करें चिता जल रही थी
ना जाने किस शख्स में रोशनी कर दी
वरना मुझे चिरागों से शाम-ए-जिंदगी ढल रही थी।

अश्क गिरे आंखों से बरसात की तरह 
हम बिछड़ गए उनसे रात की तरह
जिंदगी डूबी रही समंदर में तो क्या हुआ
दिल रोता है बिरहन के प्यास की तरह।।


वो जिंदगी में आए हसीन कल की तरह
लिखे भेजे हर खत को गजल की तरह 
हम क्या कहें अपने दिल की दास्तां यारों
वो अब याद भी करते हैं तो गुजरे कल की तरह।।


चले जाएंगे तेरे जीवन से अनजानों की तरह
भूल जाना तुम भी मुझे बेगानों की तरह
मैं मर जाऊं तो भी आंसू ना गिराना
मेरी मातम में आ जाना मेहमानों की तरह।।

एक सवाल मेरे दिल में घर कर गया है
जैसे शांत जल में सुनामी लहर कर गया है
मैं उनके साथ रहकर बेगाना कैसे हो गया 
वाे हंसती-खेलती जिंदगी में जहर भर गया है।।


याद गर आए तो मेरी याद में रोना
भूल जाना मेरे हर बात में रोना 
क्या हुआ जो अश्क मेरे तू न समझे 
हो चर्चा मेरी तो तुम रात में रोना 


दोस्ती तेरी मेरे दिल में एक जख्म सी कर गई 
दिल में लगे जख्मों को और नम सी कर गई 
हम को तो दर्द सहने की आदत सी है लेकिन  
तेरी दोस्ती जख्मों में और जख्म सी कर गई।।



याद कर लेना जब परेशान हो जाओगी
मैं आऊंगा जरूर जब ध्यान लगाओगी 
मरने के बाद तो  जलकर राख हो आऊंगा 
क्या पता तुम राख में मुझे ढूंढ पाओगी


बहुत करीब थी खुशियां वह हाथ छोड़ गए 
मंजिल सामने देखकर वह साथ छोड़ गए 
गिरकर संभलना मुश्किल हो गया ये दोस्त 
मुझे दुःखी होते ही करना बात  छोड़ गए।।



हर रात उनकी याद तड़पाती रहती है
सांसे भी वफा की गीत गाती रहती हैं 
यकीं नहीं होता वह भूलना चाहते हैं 
बातें कल की आज सितम ढाती रहती हैं।।


इस दिल में दर्द की कसक अभी बाकी है
भींगी हैं आखें लेकिन पलक अभी बाकी है
जिंदगी मेरी मुझको चिढ़ाती है ऐ मेरे दोस्त 
रूका क्यों है यश जब सड़क अभी बाकी है।।


अश्क आंखों से बहते बहते एक निशान बना दिए
मीट ना पाए कभी वो ऐसा पहचान बना दिए
दिल में उनका दर्द हमेशा रहेगा ऐ दोस्त 
क्यों यश जान गवा कर उन्हें जान बना दिए।।


जीवन में हर शख्स मुझे आजमाता रहा 
मैं पागल‚ हर राह में ठोकर खाता रहा 
ना पता था वह भी छोड़ जाएंगे हमें 
जिनके सुख दुख में मैं साथ निभाता रहा।।


यादों को दबाकर वह नादान बन बैठी हैं 
उसे क्या पता वो मेरी जान बन बैठी हैं
दुनिया को को जानकर भी अन्जान बन बैठी हैं 
उन्हें क्या पता वो  मेरी जान बन बैठी हैं।।

© प्रवीन यश
कोईराजपुर, हरहुआ‚ वाराणसी
09450112497
08423841557

दर्द को भी हमने रोते देखा है

दर्द को भी हमने रोते देखा है 
आप सोचेंगे ऐसा कहां होता है 
लेकिन यह सच है कि दर्द को भी हमने रोते देखा है 
एक छोटा बच्चा रोड पर नंगा डाल रहा था 
उसे दर्द देने को दर्द भी मचल रहा था 
उसके ऊपर दुख दर्द का जादू नहीं चल पाया 
वह रोया तो जरुर लेकिन आंसू नहीं निकल पाया 
दुख दर्द से बेखबर उसे रोड किनारे सोते देखा है 
दर्द को भी हमने रोते देखा है.......
वह बच्चा बढ़ा हुआ तकदीर साथ थी
माता-पिता की दी हुई जागीर साथ थी 
बढ़ने लगा कदम तो ठोकर ना रोक पाया 
दुख दर्द का कोई उसे असर न रोक पाया 
गरीबी बेबसी में भी रिस्तों को ढोते देखा है
दर्द को भी हमने रोते देखा है.....................
वह इतना बेदर्द था कि दर्द को भी उससे दर्द था 
क्या देगा खुदा दर्द उसे जब दर्द भी उसका हमदर्द था 
जीवन के बीच पड़ाव में उसे ऐसा लगा ठोकर 
जो साथ में रहा उससे भी नहीं दुख दर्द कहा रोकर 
दर्द–ए–गम को साथ लेकर हमने आंसू पिरोते देखा है 
लेकिन यश सच है कि हमने दर्द को भी रोते देखा है...........


© प्रवीन यश
कोईराजपुर, वाराणसी
09450112497
08423841557

शनिवार, 15 जुलाई 2017

अब तो खुश रहेंगे मुझे रुलाने के बाद
याद नहीं आएंगे अब भूल जाने के बाद
उनको खुश देखने को कितना गम झेलना पड़ा
दुनिया का हर जुल्मों और सितम झेलना पड़ा
खुश हो गए हस्ती मेरी मिटाने के बाद
याद नहीं आएंगे अब.......

सोचता हूं क्या बुरा किया मैंने उनके साथ
पहले थामकर अब छोड़ने लगे हैं मेरे हाथ
रुकेंगे अश्क ना तेरे मेरे चले जाने के बाद
याद नहीं आएंगे अब.......

ना मिलेगा कोई यश जैसा कुर्बान होने वाला
कौन होगा जहां में तेरा दिल जान होने वाला
तब हँसेगी दुनियां तुझको रुलाने के बाद
याद नहीं आएंगे अब भूल जाने के बाद

© प्रवीन यश
कोईराजपुर, वाराणसी
09450112497
08423841557


अब तो हर मोड़ पर निराश छोड़ जाते हैं
पलभर खुशी देखकर उदास छोड़ जाते हैं
हम तो उनकी यादों के सहारे ही जी लेते
लेकिन दो पल दे कर साथ छोड़ जाते हैं
अब तो हर मोड़ पर.......
कल बैठकर साथ मेरे घंटों थे बातें करते
आज पल भर में मेरा हाथ छोड़ जाते हैं

वह सुबह शाम मिलना और खूब बातें करना
कुछ कसमों और बातों के साथ जीना मरना
तोड़कर मेरे सपने हर रात छोड़ जाते हैं
अब तो हर मोड़ पर.....

दिल की कोई बात उनसे कह नहीं पाते हैं
जीते नहीं हैं साथ तो क्यों मर नहीं जाते हैं
थोड़ी मुस्कुरा कर वो विश्वास तोड़ जाते हैं
अब तो हर मोड़ पर.........

हम भी उनसे मिलने की उम्मीद नहीं करते हैं
अपने साथ ही चलने की जिद नहीं करते हैं लेकिन..
उनसे मुलाकात कि एक आश छोड़ जाते हैं
अब तो हर मोड़ पर.....

उन की बगिया को हमने खुशी दे दिया
सूखे फूल पौधों को भी जिंदगी दे दिया
यश देख तेरा करके सत्यानाश छोड़ जाते हैं
हां यह सच है कि वो अब निराश छोड़ जाते हैं

© प्रवीन यश
कोईराजपुर, वाराणसी
09450112497
08423841557


गुजरा हुआ पल एक ख्वाब होता चला गया
वह जितना दूर गया एक राज होता चला गया
मैं उसके बिना एक पल भी गुजारा नहीं
वह जब दूर गया तो मैं उदास होता चला गया
गुजरा हुआ पल.........

उसके साथ जीवन का हर पल गुजारना चाहता था उसके गम व खुशी को दिल में सवारना चाहता था
एक ख्वाहिश मेरे दिल की जो ख्वाब होता चला गया गुजरा हुआ पल.....

वह पास बैठ जाते मेरे दिल के दरवाजे पर
जैसे पहरा हो उनका मेरे हर एक इरादे पर
अश्क निकलने से से चेहरा बेदाग होता चला गया
गुजरा हुआ पल....

मैं सोचता था एक दिन वह मेरे हो जाएंगे
बिना उनके एक पल हम नहीं सो पाएंगे
दिल टूटा तो जर्रे-जर्रे से आवाज होता चला गया
गुजरा हुआ पल......

आप सुन ले में जहां से मोहब्बत की उम्मीद ना करना दिल लाख कोशिश करे लेकिन आप जिद ना करना

(और यदि मन न मानों तब)

देख लो तेरा यश कैसे बर्बाद होता चला गया
गुजरा हुआ पल एक ख्वाब होता चला गया।

© प्रवीन यश
कोईराजपुर, वाराणसी
09450112497
08423841557


उन्हें मौका मिला होता तो क्या-क्या कर गए होते
मेरी तैरती हुई किस्ती भी डूबा कर गए होते
उन्हें मौका मिला होता तो क्या-क्या कर गए होते

मैं हंसता खेलता रहता था गुमसुम पड़ी राहों में
जाने आ गया कैसे उस शख्स के निगाहों में
लगाकर दिल सराफत से वो तन्हा कर गए होते
उन्हें मौका मिला होता तो क्या-क्या कर गए होते

मैंने उनसे मोहब्बत दिल से कर ली भूल थी मेरी
निगाहे दूर खुद मंजिल से कर ली भूल थी मेरी
मैं हंसता भी अगर तन्हा तो वो रुला कर गए होते
उन्हें मौका मिला होता तो क्या-क्या कर गए होते

गजब ए इश्क है साथी गजब इसमें मोहब्बत है
यश जिसको चाहता ज्यादा उसीके दिल में नफरत है
इन हंसती-खेलती आंखों में आंसू भर गए होते
उन्हें मौका मिला होता तो क्या-क्या कर गए होते

© प्रवीन यश
कोईराजपुर, वाराणसी
09450112497
08423841557


कभी मिले तो दिल की आवाज कह दूं
जो दिल में छुपाया है वह राज कह दूं
कभी मिले तो दिल की आवाज कह दूं

वो मजलिस भरे सपने जो लगते थे अपने
एक तेरे ही प्यार में लग गए जिनको रंगने
जीवन के वो दिन और वो रात कह दूँ
कभी मिलो तो दिल की आवाज कह दूं

कितना अश्क गिरते हैं तन्हा अकेले में
हम अब तड़प रहे हैं गम के तबेले में
महसूस नहीं कर पाए वो एहसास कह दूं
कभी मिलो तो दिल की आवाज कह दूं

यश दुनिया के भीड़ में खो कर क्या मिला
ना मिली खुशियां कोई ठोकर बड़ा मिला
कुछ अच्छी-2 बातें कुछ खराब कह दूं
कभी मिलो तो दिल की आवाज कह दूं

© प्रवीन यश
कोईराजपुर, वाराणसी
09450112497
08423841557


गरीबी की परिभाषा।

आज परिभाषा सुनकर आंसू बरस जाता होगा।
कभी सोचा है आपने गरीब क्या खाता होगा।
शाम की चिन्ता दिन में सुबह की चिन्ता रात में।
रोटी नमक मिलाकर खा लेता होगा साथ में।
टमाटर, प्याज खाने को वो तरस जाता होगा।
कभी सोचा है आपने गरीब क्या खाता होगा।।

ना बिस्तर मिलता होगा ना कोई खाट मिलती होगी।
उसको दर्द होता होगा जब भी रात मिलती होगी।
आसमा को ओढ़ता और धरती को बिछाता होगा।
कभी सोचा है आपने गरीब क्या खाता होगा।।

कड़ी मेहनत करके कुछ रूपये कमा लेता होगा।
कुछ रोटी दाल में तो कुछ का ब्याज चुका देता होगा।
दुख को खाकर अपने आंषुओं को पी जाता होगा।।
कभी सोचा है आपने गरीब क्या खाता होगा।।

© प्रवीन यश
कोईराजपुर, वाराणसी
09450112497
08423841557


बुधवार, 10 मई 2017

बिन तेरे बदहवास सी जिंदगी हो गई है
ठंडी में फटे लिबास सी जिंदगी हो गई है
तेरे बिन न कहीं लगता है मन न चलती है कलम
कैसे लिखूं जब उदास सी जिंदगी हो गई है
बिन तेरे बदहवास सी......

छोड़कर सारा जग यूँ हमारा बनी तुम
जब भी तन्हा रहा तो सहारा बनी तुम
लगा मेरी आंखों का तारा बनी तुम
चाँद ही तेरा जीवनसाथी निकला मैं क्या करूं
वैसे भी अब मेरी सूर्यास्त सी जिंदगी हो गई है।
बिन तेरे बदहवास सी.........

जैसे बारिश के आने से आती है हरियाली
वैसे अभी तक मेरी रखी तूने दुआ खयाली
पतझड़ भी मिलता तो भी खुश हो लेता लेकिन
देखो अब तो सुखी घास सी जिंदगी हो गई है
बिन तेरे बदहवास सी........

हवाओं का चलना पत्तियों का हिलना
तुम्हें याद है ना वो छुप-छुप के मिलना
लिखूं क्या कहूं क्या तेरे बिन रहूं क्या
सुनो अब आखरी सांस सी जिंदगी हो गई है
बिन तेरे बदहवास सी......

जाओ तुमको जाना है ये यश क्या करेगा
केवल तुम जानती हो ये बस क्या करेगा
कलम रोज कलप कर डायरी पर लिखेगी
क्यों तेरे चाहत साथ सी जिंदगी हो गयी है।
बिन तेरे बदहवास सी........


कुछ खोजना हो तो यहां से खोजें

योगदान देने वाला व्यक्ति

पिता जी के सर की ताज है बेटी, हंसता हुआ एक समाज है बेटी

पिता जी के सर की ताज है बेटी हंसता हुआ एक समाज है बेटी लेकिन बेटी ऐसे नहीं हो सकती जैसे नजर आयी आज है बेटी पिता से है खतरा बता वो रह...

कुछ नया सोचने की आदत है हममे। कुछ नया करने की फितरत है हममें।।
क्या पता तकदीर कल कहॉ ले जाये। यू आज ही में जीने की चाहत है हममें।।

मेरे पापुलर अल्फाज....

Blog Archive