रविवार, 13 अगस्त 2017

चंद रुपयों के खातिर ईमान बेचने वाले बहुत हैं
राजनीति के नाम पर गीता-कुरान बेचने वाले बहुत हैं।
मर गए गोरखपुर में दर्जनों बच्चे बिना ऑक्सीजन के
घर में ही नंगा हो गए साहब इंसान देखने वाले बहुत हैं।।

गलती इसकी है या उसकी है शोर मंत्रालय में मचा है
सब डैकत भ्रष्टाचारी हैं सच्चा कौन मंत्रालय में बचा है
कहते हो यह सुशासन है शर्म करो साहब, तेरे लोग ही
तेरे सुशासन को खुले आम बेचने वाले बहुत हैं।
राजनीति के नाम पर गीता-कुरान बेचने वाले बहुत हैं।।


गुरुवार, 10 अगस्त 2017

सुनो जी एक माँ मर गयी
उनकी अस्थियां गल गयी।।
उसका बेटा एनआरआई था
जिसका लाखों रुपए कमाई था।।

अफसोस कि मां के मरने पर
बेटे को पता नही चला होगा।
मां प्राण त्यागी होगी ये सोचकर
बेटा विदेश में अच्छा भला होगा।।

मेरे मौत की खबर सुनकर
मेरा बेटा जहाज से आ जायेगा।
मेरे शरीर से लिपट कर झकझोरेगा
बिलखेगा रोएगा खूब पछतायेगा।।

लेकिन उस मां को क्या पता था
मेरा बेटा डेढ़ बरस बाद आएगा।
गली हुई हड्डियां और मेरे कंकाल देख
मुझे छुएगा भी नहीं बाहर भाग जाएगा।।

यह उसी मां का बदन है जिससे
वर्षों तक लिपटकर दूध पीते रहे।।
यह उसी मां का गर्भ है
जिसमें नौ माह तक जीते रहे।।

याद करो उस मां के स्तन का हर
एक बून्द दूध भी निचोड़ लेते थे।
मां कुछ खाने जाती तो झट से
उसके हाथों से छोड़ लेते थे।।

सोचो उस मां का खून जब
पानी सा हो गया होगा।
तेरे लिए रोई छटपटाई होगी
उसका आत्मा भी रो गया होगा।।

जब मां बोली अब बात न करना
तब वापस तुम तो आ सकते थे।
अपने परिचित या रिश्तेदार को
यह बात बता तो सकते थे।।

अमेरिका से मुम्बई पुलिस को
फोन कर वहां भेज दिया।
तुम नहीं आने की सोचे और
बस पुलिस को सहेज दिया।।

वाह रे दुनियां के मालिक कब
तुमने क्या सोचा था।
बड़की बिल्डिंग वाले अंधे
तुमको किसने रोका था।।

यश मानव तो जिंदा हैं पर
मानवता मरती रोज यहाँ।
जो तुझे उठाकर दफन हुए
वो लगते हैं तुम्हें बोझ यहाँ।।

डिसक्लेमर :- ये पोस्ट पूर्णतया कॉपीराइट प्रोटेक्टेड है, ये किसी भी अन्य लेख या बौद्धिक संम्पति की नकल नहीं है। इस पोस्ट या इसका कोई भी भाग बिना लेखक की लिखित अनुमति के नकल, चित्र रूप या इलेक्ट्रॉनिक रूप में प्रयोग करने का अधिकार किसी को नहीं है, अगर ऐसा किया जाता है निर्धारित क़ानूनों के तहत कार्रवाई की जाएगी।
©प्रवीन यश #यश #प्रवीन_यश
हरहुआ, वाराणसी
9450112497


बुधवार, 9 अगस्त 2017

कभी चढ़ जाती पेड़ पर
कभी झूल जाती डाल पर।
कभी आ जाती आंगन में
कभी चढ़ जाती दीवाल पर।।

एक दिन की बात है जब वो
पेड़ से उतरकर नीचे आ गयी।
घर में लगी फुलवारी में
खुद खींचे-खींचे आ गयी।।

पास में घूम रहे आवारा कुत्तों
की निगाह उस पड़ गयी।
कुत्ते झट से उसे दबोचने दौड़े
जिससे बेचारी डर गयी।।

उसको अपनी जान बचाना
लग रहा था बहुत भारी।
डरी रोयी कोई न सुना
कोई न सुना लचारी।।

हिम्मत कर एक कमरे में
वो भाग गयी छुपने को।
देर भले कोई आएगा
मेरा हाल पूछने को।।

मुंह बाये हुए दरिंदे
कुत्ते उसे खोज रहे थे।
उससे प्यास मिटायेंगे वो
मन ही मन ये सोच रहे थे।।

डरी गिलहरी देखते मालिक
कुत्तों को मारने दौड़े हैं।
कुत्ते बोले सत्ता मेरी है
सीने हैं मेरे चौड़े हैं।।

पूछो इस गिलहरी से तुम
धरती पर क्यों आती है।
उछल कुद करती क्यों इतनी
क्यों इतना इतराती है।।

सत्ता मेरी है तुम मेरा
कुछ नहीं कर पाओगे।
हम रोज गिलहरियों पर टूटेंगे
तुम कितने को बचाओगे।।

बोल दो अपनी इज्जत प्यारी
है इन गिलहरियों को।
धरती पर ना रखें कदम ये
तोड़ें भले टहनियों को।।

तब तक यह सारी बातें
हर जंगल वन पहुच गयी।
सभी गिलहरी न्याय मांगने
राजा के घर पहुच गयी।।

राजा गूंगा बहरा बन गया
कुत्तों को उसने ही पाला था।
अपने प्रजा की फिक्र न उसको
उसका मुँह खुद काला था।।

बात बात पर ट्वीट कर देता
सच्चा राजा बनने को।
डरी गिलहरी न्याय मांगती
नहीं बचा कुछ कहने को।।

तू जनता का "यश" है
तू जनता का भगवान है।
न्याय दे दो गिलहरी को
उसके अंदर भी तो जान है।।

डिसक्लेमर :- ये पोस्ट पूर्णतया कॉपीराइट प्रोटेक्टेड है, ये किसी भी अन्य लेख या बौद्धिक संम्पति की नकल नहीं है। इस पोस्ट या इसका कोई भी भाग बिना लेखक की लिखित अनुमति के शेयर, नकल, चित्र रूप या इलेक्ट्रॉनिक रूप में प्रयोग करने का अधिकार किसी को नहीं है, अगर ऐसा किया जाता है निर्धारित क़ानूनों के तहत कार्रवाई की जाएगी।

©प्रवीन यश #यश #प्रवीन_यश
हरहुआ, वाराणसी
9450112497


शनिवार, 5 अगस्त 2017

आप हैं तब इस जहां में हम हैं
आप नहीं हैं तो मुझमें क्या दम है।
आप साथ हैं तो दुनियां जीतेंगे
आप नहीं हैं तो यश बेदम है।।

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©प्रवीन यश #यश #प्रवीन_यश


शुक्रवार, 4 अगस्त 2017

गजब हुआ जब सोई चाची
सपने में थी खोई चाची
बाल हाथ में लेकर कोई
सहलाया खुश होई चाची
कोई काट गया चोटी तब
उठते ही खूब रोइ चाची
गजब हुआ जब सोई चाची.....

पता चला जब चच्चा को तब
गुस्से से वो लाल हो गए
अगल-बगल सबको चिल्लाए
बोले हम कंगाल हो गए
रोज शैम्पू तेल लगा-लगा के
चोटिया थी संजोई चाची
गजब हुआ जब सोई चाची....

बड़ी कीमती थी चोटी वो
बड़ा जतन से बढ़ाई थी
उसकी साजो सज्जा में ही
लग गयी मेरी कमाई थी
चाची को दौरा आ जाता
सोच के दिल घबरा जाता
कलियें थी चोटी धोई चाची
गजब हुआ जब सोई चाची.......

पहुच गए तब नेता गायक
बोले मेरी बात नहीं मानी
नेबुआ मिर्ची लटका लेती
होती ना ऐसा मनमानी
वाह अनुभवी गायक साहब
पहिले ही आप बताये थे
खुलल केश गज्झिन में नजर लगी
तब एगो नेबुआ मिर्ची गाये थे
सोचे #यश बइठ देवढीया पर
कैइसे अब का होइ चाची
गजब हुआ जब सोई चाची

कट गई चोटी रोइ चाची

डिसक्लेमर :- ये पोस्ट पूर्णतया कॉपीराइट प्रोटेक्टेड है, ये किसी भी अन्य लेख या बौद्धिक संम्पति की नकल नहीं है। इस पोस्ट या इसका कोई भी भाग बिना लेखक की लिखित अनुमति के शेयर, नकल, चित्र रूप या इलेक्ट्रॉनिक रूप में प्रयोग करने का अधिकार किसी को नहीं है, अगर ऐसा किया जाता है निर्धारित क़ानूनों के तहत कार्रवाई की जाएगी।
©प्रवीन यश #यश #प्रवीन_यश
हरहुआ, वाराणसी

नोट:- सुनिए जी इस कविता का किसी से कुछ भी कोई या किसी प्रकार का सम्बन्ध नहीं है।


गजब  का माहौल बन गया आज अपने देश में
चोटी कटवा घूम रहा है ना जाने किस भेष में
चर्चा बड़ी-बड़ी चल रही गांव और शहरिया में
शोर मचा है चोटी कटवा आता है अन्हरिया में
काट के चोटी गायब होता कोई देख न पाता है
और नहीं कुछ चोटी काटे, चोटी से क्या नाता है
कोई कहे अफवाह मात्र है कोई कहता सही है घटना
कोई कहे ये अच्छे दिन हैं मां बहनों तुम इनसे बचना
यश क्या बोले समझ न आवे ऐसा कैसे हो रहा है
चोटी कटवा आ गया तो मुँहनोचवा कहाँ सो रहा है
©प्रवीन यश
हरहुआ, वाराणसी


बुधवार, 2 अगस्त 2017

जापान के क्योटो शहर के जैसे काशी को बनवा देंगे
पीएम साहब, बोल दिए हैं कि बुलेट ट्रेन चलवा देंगे।।
गजब के वादे गजब के दावे आज के राजनेताओं के
जिनको रोटी नहीं नसीब उनको पैखाने में निपटा देंगे।।


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