बुधवार, 19 फ़रवरी 2014



जाने किससे क्या कहें वफाऐं हमसे भी हो सकती हैं।
दिल अगर लग जाए तो गुनाहें हमसे भी हो सकती हैं।।

कोई सुनने के लिये बाते चेहरा तो घुमाए
मुलाकात को लाचार निगाहें हमसे भी हो सकती हैं।।

कई कलियॉ बागों में खिलती हुई नजर आती हैं।
तितलियॉ फूलों से मिलती हुई नजर आती हैं।।
देखकर उनको हम नजरे मिला लेते हैं
क्योंकि मोहब्बत में कुछ सजायें हमसे भी हो सकती हैं।।

हमसे कोई दिल मिलाने का प्रयास तो करे
मैं कैसे कह दू पहले कोई विश्वास तो करें
'यश' बोलता है कुछ अदाऐं हमसे भी हो सकती हैं।।
दिल अगर लग जाए तो गुनाहें हमसे भी हो सकती हैं।।


प्रवीन यादव 'यश'


तुम साथ थी तो जहॉ साथ चलता था
मैं भी नहीं तनहां साथ चलता था।

वो स्कूल के दिन या कालेज के दिन
तुम रहती थी नहीं एक दिन मेंरे बिन
क्या कहें जिंदगी मेंरे क्या साथ चलता था।।
तुम साथ थी जो जहॉ साथ चलता था।।


तेरे काजल की बिन्दीया लगी कान नीचे
और हर पल तेरा दुआ साथ चलाता था।।
तुम साथ थी जो जहॉ साथ चलता था।।

गलत काम करने से रोके तु ऐसे
कि लगता था जैसे खुदा साथ चलता था।।
तुम साथ थी जो जहॉ साथ चलता था।।

प्रवीन यादव 'यश'



कल जब थोड़ा सा पीया तो तेरी याद आ गयी।
सच जब पैग हाथ ​में लिया तो तेरी याद आ गयी।
पहले घंटो बैठकर तेरे बारे में चर्चा करते थे
एक तू ही ​था जिसपर जी जान से मरते थे
तु छोड़ दिया क्यों मुझे कसमें खाने के बाद याद आयी गयी।
सच जब पैग हाथ में लिया तो तेरी याद आ गयी।।



वो चलता गया हम भी चलते गये
वो बदलता गया हम बदलते गये।
मिलकर देख कभी एक प्यारी सुबह
ढल रही जिंदगी शाम ढलते गये।।

शाम प्यारी ​सी थी रात प्यारी सी थी
उसके सुख—दुख में एक भागीदारी सी थी
अब भरोसे की डोर यू लगी टूटनें
कि इन आंखों से आंशु निकलते गये।।

वो हंसकर के मुझसे तेरा बात करना
हो गलती कोई तो मुझे माफ करना
जब रूठा था मैं तो मनाने आती थी
अब तो गुस्से में 'यश' और जलते गये।।

वो चलता गया हम भी चलते गये
वो बदलता गया हम बदलते गये।
कि इन आंखों से आंशु निकलते गये।।

प्रवीन यादव'यश'

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