सोमवार, 14 अक्टूबर 2013


कलम के सिपाही आजाद हैं।

मीडिया में आज उपर बैठे गुरू घ्‍ांटाल हैं,
कोई कहता फ्राड तो कोई कहता दलाल है।
कुछ पत्रकारों पर हमें आज भी नाज है,
देखो दलालों कलम के सिपाही आजाद हैं।।

कुछ लोग मैनेज कराने का प्रयास करते हैं,
खबरों को हरदम दबाने का प्रयास करते हैं।
कुछ लोग लिख देते तो लग जाती आग है
देखो दलालों कलम के सिपाही आजाद हैं।।

ये कलम खिरी सांस तक ऐसे ही चलेती रहेंगी,
हमेशा अपने वाक्‍यों से आग लगलती रहेंगी।
मौत का भी गम नहीं अब हमारे पास हैं,
देखो दलालों कलम के सिपाही आजाद हैं।।

आज हमारा हर लेख तुमको चिढा रहा होगा,
जानता हू मैं कि तू भी मुझे गरिया रहा होगा।
जो निर्भिक पत्रकार हैं ‘यश‘ उनकी जिन्‍दाबाद है,
देखो दलालों कलम के सिपाही आजाद हैं।।

BY:-प्रवीन यादव 'यश'

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