शनिवार, 13 जुलाई 2019



पिता जी के सर की ताज है बेटी
हंसता हुआ एक समाज है बेटी
लेकिन बेटी ऐसे नहीं हो सकती
जैसे नजर आयी आज है बेटी
पिता से है खतरा बता वो रही है
मां को भी नीचा दिखा वो रही है
बहस हो रही है बड़े चैनलों पर
घरवालों से अब नाराज है बेटी
पिता जी के सर की ताज है बेटी, हंसता हुआ एक...
दुनियां के दुख से बचाता पिता है
कहानी सुनाकर सुलाती वो मां है
ठुकरा के सबको चली जा रही है
बसाने अलग एक समाज है बेटी
पिता जी के सर की ताज है बेटी, हंसता हुआ एक...
मां बाप को तुम तो इतना डरा दी
छीन डाली हर बेटियों की आजादी
फिर कैद होंगी बेटियां बेड़ियों में
यश कैसे लिखे की आजाद है बेटी
पिता जी के सर की ताज है बेटी, हंसता हुआ एक...
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©प्रवीन यश #यश #प्रवीन_यश
हरहुआ, वाराणसी
9450112497

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पिता जी के सर की ताज है बेटी, हंसता हुआ एक समाज है बेटी

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कुछ नया सोचने की आदत है हममे। कुछ नया करने की फितरत है हममें।।
क्या पता तकदीर कल कहॉ ले जाये। यू आज ही में जीने की चाहत है हममें।।

मेरे पापुलर अल्फाज....