सोमवार, 12 नवंबर 2012



कुछ पल के लिये


सोचता हू कुछ पल के लिये खामोश हो जाऊ मै।
धुधली हूई धूंध सी यादों में खो जाऊ मै। सोचता हू ................. खामोश हो जाऊ मै।
उनको देखता हू तो बोलने की चाहत जाग जाती है।
कोई अपना बड़ी दूरी है और उसकि याद आती है।।
उस अपने पन की यादों के आगोस में खो जाऊ मैं। सोचता हू ................. खामोश हो जाऊ मै।
लाख कस्में वो पल में दिला जाते हैं।
फिर कस्मों को कैसे भुला जाते हैं।।
आखें खुली हो और सपनों में खो जाऊ मैं। सोचता हू ................. खामोश हो जाऊ मै।
दर्द कितना है इस दिल में प्रवीन जानता है।
अस्क सूखे नहीं अभी वो रात दिन जानता है।।
छोड़कर ये दुनिया सरफरोश हो जाऊ मै। सोचता हू ................. खामोश हो जाऊ मै।
माता का प्यार तो बचपन से मिला मुझको।
बीबी का प्यार तो जीवन में मिला मुझकों।।
फटे आचल के टूकड़े में टूटकर सो जाऊ मैं। सोचता हू ................. खामोश हो जाऊ मै।

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