मेरे हर बात पर सवाल पूछती है वो
दिल में लगे जख्मों का हाल पूछती है वो।।
वो तो खुद शान्त बैठी है दुखी होकर
जैसे खाली हुई है अभी ही रोकर
उसके पास भी दूखों का अम्बार लगा था
फिर भी मेरे दुखों का मलाल पूछती है वो।।
मेरे हर बात पर सवाल पूछती है वो.............................................................
उम्मीद से रिस्ता तोडकर चली है
जिस आग में जला मै वो भी वहीं जली है।
माता पिता के दुख में वो तो थी खुद दूखी
लेकिन मेरे परिवार का हर हाल पूछती है वा।।
मेरे हर बात पर सवाल पूछती है वो...........................................................
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