सोमवार, 12 नवंबर 2012



मुझे है पता मुझको क्या देगी दुनिया
हॅसकर के एक दिन जला देगी दुनिया, 
माता पिता का एक टुकड़ा भी हू,
ये माना कि मिट्टी का पूतला भी हू।
तो फिर मिट्टी में ही क्यों मिला देगी दुनिया
 मुझे है पता मुझको क्या देगी दुनिया।।
कोई साथ चलने का करता है वादा
कोई प्यार हद से भी करता है ज्यादा।
तो फिर एक दिन क्यों भुला देगी दुनिया
 मुझे है पता मुझको क्या देगी दुनिया।।
जिनके साथ बैठे कई दिन गुजारा
मेरा दिल कहा ये भी है सबसे प्यारा।
क्यों उसको भी एक दिन सता देगी दुनिया
 मुझे है पता मुझको क्या देगी दुनिया।।
ये माना कि दूनिया मं कुछ ना हमारा
 तो फिर क्यों बनु दूसरों का सहारा।
मेरा कौन है क्या बता देगी दुनिया
मुझे है पता मुझको क्या देगी दूनिया
बाधकर के कफन में सुला देगी दुनिया
चार कन्धों पर मुझको उठा लेगी दुनिया।
कुछ लकड़ीयों से छोटी चिता को बनाकर
लाष को गंगा मईया में नहला धुलाकर
सुला कर चिता पर जला देगी दुनिया
मुझे है पता मुझको क्या देगी दुनिया।।

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