रविवार, 18 नवंबर 2012

हार मान लेने से अच्छा है प्रयास करें



शुक्रवार, 16 नवंबर 2012




वो पत्ती थी गुलाब की
मैं बूद था शराब का
वो मौसम सदाबहार थी
मैं पतझड़ का सबाब था।।
मैं कितना खराब, मैं कितना खराब था।।
वो फुलो सी हसती थी
मैं कांटों सा धसता था
वो प्यासे का कुंआ ​थी
मैं सुखा हुआ तालाब था
मैं कितना खराब था, मैं कितना खराब था।।
अब बदला मौसम पलभर में
सब बदल गया ​जीवन भर में
कितना टूटा दिल में मेरा
आखों में अश्कों का बरसात था
मैं कितना खराब था, मैं कितना खराब था।।
वो भुल गयी सूखे पत्तों सा
मै लटका भवरों के छत्तों सा
कहने को तो उस्ताद था
लेकिन हॉ यश मैं कितना खराब था क्या.....................
सचमुच मैं इतना खराब था।।



मेरे दिल से दूखी होकर मुझे भुलाए बैठे हैं
मेरे यादों की चिता जलाये बैठे हैं।
मुझे तो आज भी उनसे ही मोहब्बत है।
जाने क्यों वो मुह छुपाये बैठे हैं।।

वो आगे चलने के आदि हो गये
जाने कैसे हम साथी हो गये।
हम तो उन्हें आज भी याद करते हैं
और याद में उनके शराबी हो गये।।

उनकी यादों ने मुझे शराबी बना दिया
उनकी वफाओं ने मौसम गुलाबी बना दिया।
मै तो कभी शराब पीने की चाहत नहीं रखा
उनकी एक पल की बेवफाई ने पीने का आदि बना दिया।।

मुझे पता हे वो आज भी हमसे मोहब्बत करते हैं
भुलकर सारे गम वो इनायत करते हैं।।
हम तो चाहकर भी उन्हें नहीं समझ पाते
लेकिन वो तो रूठकर भी हमे समझा करते हैं।

सोमवार, 12 नवंबर 2012



कुछ पल के लिये


सोचता हू कुछ पल के लिये खामोश हो जाऊ मै।
धुधली हूई धूंध सी यादों में खो जाऊ मै। सोचता हू ................. खामोश हो जाऊ मै।
उनको देखता हू तो बोलने की चाहत जाग जाती है।
कोई अपना बड़ी दूरी है और उसकि याद आती है।।
उस अपने पन की यादों के आगोस में खो जाऊ मैं। सोचता हू ................. खामोश हो जाऊ मै।
लाख कस्में वो पल में दिला जाते हैं।
फिर कस्मों को कैसे भुला जाते हैं।।
आखें खुली हो और सपनों में खो जाऊ मैं। सोचता हू ................. खामोश हो जाऊ मै।
दर्द कितना है इस दिल में प्रवीन जानता है।
अस्क सूखे नहीं अभी वो रात दिन जानता है।।
छोड़कर ये दुनिया सरफरोश हो जाऊ मै। सोचता हू ................. खामोश हो जाऊ मै।
माता का प्यार तो बचपन से मिला मुझको।
बीबी का प्यार तो जीवन में मिला मुझकों।।
फटे आचल के टूकड़े में टूटकर सो जाऊ मैं। सोचता हू ................. खामोश हो जाऊ मै।




उनसे एक पल में ऐसे मोहब्बत हुई जिन्दगी जैसे मेरी बदल ही गई।
मै ना सोचा ना समझा कभी भुलकर ये सुलगती हुई आग जल ही गई।।
छूट जाये जहा तो भी गम ना रहे
अश्को से मेरी आखें भी नम ना रहें
चाहे चल जाये जीवन मेरा गम नहीं
मेरी चाहत पर कोई सितम ना रहे
अब दूखों और सुखों में हम कैसे हसें जब ये अश्कों की डोली निकल ही गई।
उनसे एक पल में ऐस मोहब्बत हूई जिन्दगी जैसे मेरी बदल ही गई।।
इस मोहब्बत में ऐसा करम हो गया
जैसे लगता है दिन रात कम हो गया
अब ये रोती हूई आखें हैं पूछती
हम मिले अखिर क्यों क्यों जनम हो गया



मुझे है पता मुझको क्या देगी दुनिया
हॅसकर के एक दिन जला देगी दुनिया, 
माता पिता का एक टुकड़ा भी हू,
ये माना कि मिट्टी का पूतला भी हू।
तो फिर मिट्टी में ही क्यों मिला देगी दुनिया
 मुझे है पता मुझको क्या देगी दुनिया।।
कोई साथ चलने का करता है वादा
कोई प्यार हद से भी करता है ज्यादा।
तो फिर एक दिन क्यों भुला देगी दुनिया
 मुझे है पता मुझको क्या देगी दुनिया।।
जिनके साथ बैठे कई दिन गुजारा
मेरा दिल कहा ये भी है सबसे प्यारा।
क्यों उसको भी एक दिन सता देगी दुनिया
 मुझे है पता मुझको क्या देगी दुनिया।।
ये माना कि दूनिया मं कुछ ना हमारा
 तो फिर क्यों बनु दूसरों का सहारा।
मेरा कौन है क्या बता देगी दुनिया
मुझे है पता मुझको क्या देगी दूनिया
बाधकर के कफन में सुला देगी दुनिया
चार कन्धों पर मुझको उठा लेगी दुनिया।
कुछ लकड़ीयों से छोटी चिता को बनाकर
लाष को गंगा मईया में नहला धुलाकर
सुला कर चिता पर जला देगी दुनिया
मुझे है पता मुझको क्या देगी दुनिया।।

शनिवार, 3 नवंबर 2012
















बडी तकलीफ होती गर जहॉ में प्यार ना होता।।


बडी तकलीफ होती गर जहॉ में प्यार ना होता
किसी कि याद में झगडा कोई टकरार ना होता
अगर पडती जरूरत जब कभी रिस्ते निभाने की
तो साथी हर काई होता पर वफादार ना होता।।
बडी तकलीफ होती गर जहॉ में प्यार ना होता.....................

बडा मुश्किल हो जाता जिन्दगी का तय सफर करना
बडा ही कम हो जाता इस जहॉ में रूठकर मरना
जहॉ साथ देने का तो वादा हर कोई करता
पकड तो हाथ सब लेते पर खेवनहार ना होता।।
 बडी तकलीफ होती गर जहॉ में प्यार ना होता.......................

कोई रातों को खुब सोता कोई दिन रात खुब रोता
कोई पत्थर से कांटो से कोई फुलों से खुश होता
सभी का दिल जुदा होता जुदाई नाम ना होती
तडपता दिल नहीं तनका कोई बीमार ना होता।।
बडी तकलीफ होती गर जहॉ में प्यार ना होता..................................................


















मेरे हर बात पर सवाल पूछती है वो
दिल में लगे जख्मों का हाल पूछती है वो।।

वो तो खुद शान्त बैठी है दुखी होकर
जैसे खाली हुई है अभी ही रोकर
उसके पास भी दूखों का अम्बार लगा था
फिर भी मेरे दुखों का मलाल पूछती है वो।।
             
मेरे हर बात पर सवाल पूछती है वो.............................................................

उम्मीद से रिस्ता तोडकर चली है
जिस आग में जला मै वो भी वहीं जली है।
माता पिता के दुख में वो तो थी खुद दूखी
लेकिन मेरे परिवार का हर हाल पूछती है वा।।

मेरे हर बात पर सवाल पूछती है वो...........................................................


तेरे जीवन से इतना दूर चल जायेंगें हम।
कि जहॉ से चाहकर भी लौट ना पायेंग हम।। 
ना था खुश पहले कभी ना आज हो पाया यहॉ।
ना समझ पाये हमें वो ना ही ये सारा जहॉ।।
ना भुलना तुम हमें ना याद तब आयेंगे हम।

तेरे जीवन से इतना दूर चल जायेंगे हम..............................................

ना मिला उनका वफा या बेवफा हमी रहे।
ना ही उनके राहों यश एक तेरी कमी रहे।।
रूठ गर जाओगे तो एक पल में मर जायेंगे हम।
तेरे जीवन से इतना दूर चल जायेगें हम..............................................




शुक्रवार, 2 नवंबर 2012


खुद को भी नहीं समझ सका इतना अन्जान था वो
था तो बहुत खुश नसीब पर बहुत परेशान था वो।
कहीं मॉगा तो खुशी मिली नहीं तो आशु हर राहो में थे
खुद का गम भुलाकर गैरों पर कितना मेहरबान था वो।।

खुद को भी नहीं समझ सका ..........................

पल में खुश हो जाता था पल में अश्क बहाता था।
पल में कहता साथ रहो पल भर ही साथ निभाता था।।
जाने किस मिट्टी से बना जाने किस दुनियॉ में गया।
था कुछ दिन साथ मेरे मैं भुल गया मेहमान था वों।।

खुद को भी नहीं समझ सका ..........................

जाने क्या चाहती थी दुनियॉ जाने क्यों डाहती थी दुनियॉ।
किसी मोंड पर गाली तो किसी मोड पर सराहती थी दुनियॉ।।
दुनियॉ के लिये सोता नहीं था खुद अपने का होता नहीं था।
जाने कितने कष्ट मिले फिर चेहरे पे लिये मुश्कान था वो।।

खुद को भी नहीं समझ सका ..........................
दिल का बडा नादान था वो
दुनियॉ से अन्जान था वो
कहने को शैतान था वो
पर सचमुच मेरी जान था वो
हॉ ‘यश‘ , सच कहते हैं बडा महान था वों।

                                                                   


कोई ख्वाबों में रहता है खोया यहॉ
कोई दिन रात रहता है सोया यहॉ।
कोई दिल की बीमारी से बीमारी है
कोई दिल का लगा करके रोया यहॉ।।

जिन्दगी का सफर मौत से है कठीन
जो है जिन्दा यहॉ उनसे ही पुछ लो।
ना यकीं हो तुम्हें गर मेरी बात पर
तो सवालात कुछ खुद से ही पुछ लो।।


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