शुक्रवार, 16 नवंबर 2012



मेरे दिल से दूखी होकर मुझे भुलाए बैठे हैं
मेरे यादों की चिता जलाये बैठे हैं।
मुझे तो आज भी उनसे ही मोहब्बत है।
जाने क्यों वो मुह छुपाये बैठे हैं।।

वो आगे चलने के आदि हो गये
जाने कैसे हम साथी हो गये।
हम तो उन्हें आज भी याद करते हैं
और याद में उनके शराबी हो गये।।

उनकी यादों ने मुझे शराबी बना दिया
उनकी वफाओं ने मौसम गुलाबी बना दिया।
मै तो कभी शराब पीने की चाहत नहीं रखा
उनकी एक पल की बेवफाई ने पीने का आदि बना दिया।।

मुझे पता हे वो आज भी हमसे मोहब्बत करते हैं
भुलकर सारे गम वो इनायत करते हैं।।
हम तो चाहकर भी उन्हें नहीं समझ पाते
लेकिन वो तो रूठकर भी हमे समझा करते हैं।

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