कभी चढ़ जाती पेड़ पर
कभी झूल जाती डाल पर।
कभी आ जाती आंगन में
कभी चढ़ जाती दीवाल पर।।
एक दिन की बात है जब वो
पेड़ से उतरकर नीचे आ गयी।
घर में लगी फुलवारी में
खुद खींचे-खींचे आ गयी।।
पास में घूम रहे आवारा कुत्तों
की निगाह उस पड़ गयी।
कुत्ते झट से उसे दबोचने दौड़े
जिससे बेचारी डर गयी।।
उसको अपनी जान बचाना
लग रहा था बहुत भारी।
डरी रोयी कोई न सुना
कोई न सुना लचारी।।
हिम्मत कर एक कमरे में
वो भाग गयी छुपने को।
देर भले कोई आएगा
मेरा हाल पूछने को।।
मुंह बाये हुए दरिंदे
कुत्ते उसे खोज रहे थे।
उससे प्यास मिटायेंगे वो
मन ही मन ये सोच रहे थे।।
डरी गिलहरी देखते मालिक
कुत्तों को मारने दौड़े हैं।
कुत्ते बोले सत्ता मेरी है
सीने हैं मेरे चौड़े हैं।।
पूछो इस गिलहरी से तुम
धरती पर क्यों आती है।
उछल कुद करती क्यों इतनी
क्यों इतना इतराती है।।
सत्ता मेरी है तुम मेरा
कुछ नहीं कर पाओगे।
हम रोज गिलहरियों पर टूटेंगे
तुम कितने को बचाओगे।।
बोल दो अपनी इज्जत प्यारी
है इन गिलहरियों को।
धरती पर ना रखें कदम ये
तोड़ें भले टहनियों को।।
तब तक यह सारी बातें
हर जंगल वन पहुच गयी।
सभी गिलहरी न्याय मांगने
राजा के घर पहुच गयी।।
राजा गूंगा बहरा बन गया
कुत्तों को उसने ही पाला था।
अपने प्रजा की फिक्र न उसको
उसका मुँह खुद काला था।।
बात बात पर ट्वीट कर देता
सच्चा राजा बनने को।
डरी गिलहरी न्याय मांगती
नहीं बचा कुछ कहने को।।
तू जनता का "यश" है
तू जनता का भगवान है।
न्याय दे दो गिलहरी को
उसके अंदर भी तो जान है।।
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©प्रवीन यश #यश #प्रवीन_यश
हरहुआ, वाराणसी
9450112497
बहुत खुब, बधाई आपको, ऐसे ही गीत भविष्य मे भी पोस्ट करते रहें ।
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