रविवार, 13 अगस्त 2017

चंद रुपयों के खातिर ईमान बेचने वाले बहुत हैं
राजनीति के नाम पर गीता-कुरान बेचने वाले बहुत हैं।
मर गए गोरखपुर में दर्जनों बच्चे बिना ऑक्सीजन के
घर में ही नंगा हो गए साहब इंसान देखने वाले बहुत हैं।।

गलती इसकी है या उसकी है शोर मंत्रालय में मचा है
सब डैकत भ्रष्टाचारी हैं सच्चा कौन मंत्रालय में बचा है
कहते हो यह सुशासन है शर्म करो साहब, तेरे लोग ही
तेरे सुशासन को खुले आम बेचने वाले बहुत हैं।
राजनीति के नाम पर गीता-कुरान बेचने वाले बहुत हैं।।


0 टिप्पणियाँ:

एक टिप्पणी भेजें

कुछ खोजना हो तो यहां से खोजें

योगदान देने वाला व्यक्ति

पिता जी के सर की ताज है बेटी, हंसता हुआ एक समाज है बेटी

पिता जी के सर की ताज है बेटी हंसता हुआ एक समाज है बेटी लेकिन बेटी ऐसे नहीं हो सकती जैसे नजर आयी आज है बेटी पिता से है खतरा बता वो रह...

कुछ नया सोचने की आदत है हममे। कुछ नया करने की फितरत है हममें।।
क्या पता तकदीर कल कहॉ ले जाये। यू आज ही में जीने की चाहत है हममें।।

मेरे पापुलर अल्फाज....