शनिवार, 15 जुलाई 2017

गरीबी की परिभाषा।

आज परिभाषा सुनकर आंसू बरस जाता होगा।
कभी सोचा है आपने गरीब क्या खाता होगा।
शाम की चिन्ता दिन में सुबह की चिन्ता रात में।
रोटी नमक मिलाकर खा लेता होगा साथ में।
टमाटर, प्याज खाने को वो तरस जाता होगा।
कभी सोचा है आपने गरीब क्या खाता होगा।।

ना बिस्तर मिलता होगा ना कोई खाट मिलती होगी।
उसको दर्द होता होगा जब भी रात मिलती होगी।
आसमा को ओढ़ता और धरती को बिछाता होगा।
कभी सोचा है आपने गरीब क्या खाता होगा।।

कड़ी मेहनत करके कुछ रूपये कमा लेता होगा।
कुछ रोटी दाल में तो कुछ का ब्याज चुका देता होगा।
दुख को खाकर अपने आंषुओं को पी जाता होगा।।
कभी सोचा है आपने गरीब क्या खाता होगा।।

© प्रवीन यश
कोईराजपुर, वाराणसी
09450112497
08423841557


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