सोमवार, 31 जुलाई 2017


मैं तेरे दिल में बसता था तेरे ही दिल में रहता हूं।
तुम्हें सुनाई देता है क्या जो मैं लिखता कहता हूं।।
तुम खुश हो या रोती हो यह मुझे बता दो एक दफा
क्या अभी मोहब्बत है जिंदा या भूल गयी सब प्यार वफा
क्या अब भी हिचकी आती है जब याद तुझे मैं करता हूं।
तुम्हें सुनाई देता है क्या जो मैं लिखता कहता हूं।।

वह दिन भी बड़े सुहाने थे कल जब तुम पढ़ने आती थी
जब मुझे नहीं कुछ आता था तुम बहुत मुझे समझाती थी
मैं कल बुद्धू जैसा था पर आज बहुत कुछ समझा हूं।
तुम्हें सुनाई देता है क्या जो मैं लिखता कहता हूं।।

कहीं मम्मी पापा ना समझें तुम प्यार को बड़ा छुपाती थी
घर मुझे सहेली बता बता दिन रात बहुत बतियाती थी
अब प्रेम छुपाती हो कैसे अब भी तेरी बातें करता हूं।
तुम्हें सुनाई देता है क्या जो मैं लिखता कहता हूं।।

है अगर शिकायत कोई तो एक बार बताने आ जाना
दुनियां की चिंता छोड़ के बस तुम प्यार निभाने आ जाना
सुन लो तेरी हर चिट्ठी को यश आज भी पढ़ता रहता हूं।
तुम्हें सुनाई देता है क्या जो मैं लिखता कहता हूं।।

©प्रवीन यश
हरहुआ, वाराणसी
9450112497



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