रविवार, 23 जुलाई 2017

दर्द को भी हमने रोते देखा है

दर्द को भी हमने रोते देखा है 
आप सोचेंगे ऐसा कहां होता है 
लेकिन यह सच है कि दर्द को भी हमने रोते देखा है 
एक छोटा बच्चा रोड पर नंगा डाल रहा था 
उसे दर्द देने को दर्द भी मचल रहा था 
उसके ऊपर दुख दर्द का जादू नहीं चल पाया 
वह रोया तो जरुर लेकिन आंसू नहीं निकल पाया 
दुख दर्द से बेखबर उसे रोड किनारे सोते देखा है 
दर्द को भी हमने रोते देखा है.......
वह बच्चा बढ़ा हुआ तकदीर साथ थी
माता-पिता की दी हुई जागीर साथ थी 
बढ़ने लगा कदम तो ठोकर ना रोक पाया 
दुख दर्द का कोई उसे असर न रोक पाया 
गरीबी बेबसी में भी रिस्तों को ढोते देखा है
दर्द को भी हमने रोते देखा है.....................
वह इतना बेदर्द था कि दर्द को भी उससे दर्द था 
क्या देगा खुदा दर्द उसे जब दर्द भी उसका हमदर्द था 
जीवन के बीच पड़ाव में उसे ऐसा लगा ठोकर 
जो साथ में रहा उससे भी नहीं दुख दर्द कहा रोकर 
दर्द–ए–गम को साथ लेकर हमने आंसू पिरोते देखा है 
लेकिन यश सच है कि हमने दर्द को भी रोते देखा है...........


© प्रवीन यश
कोईराजपुर, वाराणसी
09450112497
08423841557

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