रविवार, 23 जुलाई 2017

गम की राहों से मेरी अर्थी निकल रही थी
तूफान की लहरों पर सच करें चिता जल रही थी
ना जाने किस शख्स में रोशनी कर दी
वरना मुझे चिरागों से शाम-ए-जिंदगी ढल रही थी।

अश्क गिरे आंखों से बरसात की तरह 
हम बिछड़ गए उनसे रात की तरह
जिंदगी डूबी रही समंदर में तो क्या हुआ
दिल रोता है बिरहन के प्यास की तरह।।


वो जिंदगी में आए हसीन कल की तरह
लिखे भेजे हर खत को गजल की तरह 
हम क्या कहें अपने दिल की दास्तां यारों
वो अब याद भी करते हैं तो गुजरे कल की तरह।।


चले जाएंगे तेरे जीवन से अनजानों की तरह
भूल जाना तुम भी मुझे बेगानों की तरह
मैं मर जाऊं तो भी आंसू ना गिराना
मेरी मातम में आ जाना मेहमानों की तरह।।

एक सवाल मेरे दिल में घर कर गया है
जैसे शांत जल में सुनामी लहर कर गया है
मैं उनके साथ रहकर बेगाना कैसे हो गया 
वाे हंसती-खेलती जिंदगी में जहर भर गया है।।


याद गर आए तो मेरी याद में रोना
भूल जाना मेरे हर बात में रोना 
क्या हुआ जो अश्क मेरे तू न समझे 
हो चर्चा मेरी तो तुम रात में रोना 


दोस्ती तेरी मेरे दिल में एक जख्म सी कर गई 
दिल में लगे जख्मों को और नम सी कर गई 
हम को तो दर्द सहने की आदत सी है लेकिन  
तेरी दोस्ती जख्मों में और जख्म सी कर गई।।



याद कर लेना जब परेशान हो जाओगी
मैं आऊंगा जरूर जब ध्यान लगाओगी 
मरने के बाद तो  जलकर राख हो आऊंगा 
क्या पता तुम राख में मुझे ढूंढ पाओगी


बहुत करीब थी खुशियां वह हाथ छोड़ गए 
मंजिल सामने देखकर वह साथ छोड़ गए 
गिरकर संभलना मुश्किल हो गया ये दोस्त 
मुझे दुःखी होते ही करना बात  छोड़ गए।।



हर रात उनकी याद तड़पाती रहती है
सांसे भी वफा की गीत गाती रहती हैं 
यकीं नहीं होता वह भूलना चाहते हैं 
बातें कल की आज सितम ढाती रहती हैं।।


इस दिल में दर्द की कसक अभी बाकी है
भींगी हैं आखें लेकिन पलक अभी बाकी है
जिंदगी मेरी मुझको चिढ़ाती है ऐ मेरे दोस्त 
रूका क्यों है यश जब सड़क अभी बाकी है।।


अश्क आंखों से बहते बहते एक निशान बना दिए
मीट ना पाए कभी वो ऐसा पहचान बना दिए
दिल में उनका दर्द हमेशा रहेगा ऐ दोस्त 
क्यों यश जान गवा कर उन्हें जान बना दिए।।


जीवन में हर शख्स मुझे आजमाता रहा 
मैं पागल‚ हर राह में ठोकर खाता रहा 
ना पता था वह भी छोड़ जाएंगे हमें 
जिनके सुख दुख में मैं साथ निभाता रहा।।


यादों को दबाकर वह नादान बन बैठी हैं 
उसे क्या पता वो मेरी जान बन बैठी हैं
दुनिया को को जानकर भी अन्जान बन बैठी हैं 
उन्हें क्या पता वो  मेरी जान बन बैठी हैं।।

© प्रवीन यश
कोईराजपुर, हरहुआ‚ वाराणसी
09450112497
08423841557

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