उन्हें मौका मिला होता तो क्या-क्या कर गए होते
मेरी तैरती हुई किस्ती भी डूबा कर गए होते
उन्हें मौका मिला होता तो क्या-क्या कर गए होते
मैं हंसता खेलता रहता था गुमसुम पड़ी राहों में
जाने आ गया कैसे उस शख्स के निगाहों में
लगाकर दिल सराफत से वो तन्हा कर गए होते
उन्हें मौका मिला होता तो क्या-क्या कर गए होते
मैंने उनसे मोहब्बत दिल से कर ली भूल थी मेरी
निगाहे दूर खुद मंजिल से कर ली भूल थी मेरी
मैं हंसता भी अगर तन्हा तो वो रुला कर गए होते
उन्हें मौका मिला होता तो क्या-क्या कर गए होते
गजब ए इश्क है साथी गजब इसमें मोहब्बत है
यश जिसको चाहता ज्यादा उसीके दिल में नफरत है
इन हंसती-खेलती आंखों में आंसू भर गए होते
उन्हें मौका मिला होता तो क्या-क्या कर गए होते
© प्रवीन यश
कोईराजपुर, वाराणसी
09450112497
08423841557
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