शनिवार, 15 जुलाई 2017

अब तो हर मोड़ पर निराश छोड़ जाते हैं
पलभर खुशी देखकर उदास छोड़ जाते हैं
हम तो उनकी यादों के सहारे ही जी लेते
लेकिन दो पल दे कर साथ छोड़ जाते हैं
अब तो हर मोड़ पर.......
कल बैठकर साथ मेरे घंटों थे बातें करते
आज पल भर में मेरा हाथ छोड़ जाते हैं

वह सुबह शाम मिलना और खूब बातें करना
कुछ कसमों और बातों के साथ जीना मरना
तोड़कर मेरे सपने हर रात छोड़ जाते हैं
अब तो हर मोड़ पर.....

दिल की कोई बात उनसे कह नहीं पाते हैं
जीते नहीं हैं साथ तो क्यों मर नहीं जाते हैं
थोड़ी मुस्कुरा कर वो विश्वास तोड़ जाते हैं
अब तो हर मोड़ पर.........

हम भी उनसे मिलने की उम्मीद नहीं करते हैं
अपने साथ ही चलने की जिद नहीं करते हैं लेकिन..
उनसे मुलाकात कि एक आश छोड़ जाते हैं
अब तो हर मोड़ पर.....

उन की बगिया को हमने खुशी दे दिया
सूखे फूल पौधों को भी जिंदगी दे दिया
यश देख तेरा करके सत्यानाश छोड़ जाते हैं
हां यह सच है कि वो अब निराश छोड़ जाते हैं

© प्रवीन यश
कोईराजपुर, वाराणसी
09450112497
08423841557


0 टिप्पणियाँ:

एक टिप्पणी भेजें

कुछ खोजना हो तो यहां से खोजें

योगदान देने वाला व्यक्ति

पिता जी के सर की ताज है बेटी, हंसता हुआ एक समाज है बेटी

पिता जी के सर की ताज है बेटी हंसता हुआ एक समाज है बेटी लेकिन बेटी ऐसे नहीं हो सकती जैसे नजर आयी आज है बेटी पिता से है खतरा बता वो रह...

कुछ नया सोचने की आदत है हममे। कुछ नया करने की फितरत है हममें।।
क्या पता तकदीर कल कहॉ ले जाये। यू आज ही में जीने की चाहत है हममें।।

मेरे पापुलर अल्फाज....

Blog Archive