जिनकी बन्द होती हैं आंखें...उनके पास सपने होते हैं।
खुली रहे आंखें जिनकी.......उनके तो अपने-अपने होते हैं।
©प्रवीन यश
जिनकी बन्द होती हैं आंखें...उनके पास सपने होते हैं।
खुली रहे आंखें जिनकी.......उनके तो अपने-अपने होते हैं।
©प्रवीन यश
पिता जी के सर की ताज है बेटी हंसता हुआ एक समाज है बेटी लेकिन बेटी ऐसे नहीं हो सकती जैसे नजर आयी आज है बेटी पिता से है खतरा बता वो रह...
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