© प्रवीन यश
कोईराजपुर, वाराणसी
09450112497
08423841557
अब तो खुश रहेंगे मुझे रुलाने के बाद
याद नहीं आएंगे अब भूल जाने के बाद
उनको खुश देखने को कितना गम झेलना पड़ा
दुनिया का हर जुल्मों और सितम झेलना पड़ा
खुश हो गए हस्ती मेरी मिटाने के बाद
याद नहीं आएंगे अब.......
सोचता हूं क्या बुरा किया मैंने उनके साथ
पहले थामकर अब छोड़ने लगे हैं मेरे हाथ
रुकेंगे अश्क ना तेरे मेरे चले जाने के बाद
याद नहीं आएंगे अब.......
ना मिलेगा कोई यश जैसा कुर्बान होने वाला
कौन होगा जहां में तेरा दिल जान होने वाला
तब हँसेगी दुनियां तुझको रुलाने के बाद
याद नहीं आएंगे अब भूल जाने के बाद
© प्रवीन यश
कोईराजपुर, वाराणसी
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अब तो हर मोड़ पर निराश छोड़ जाते हैं
पलभर खुशी देखकर उदास छोड़ जाते हैं
हम तो उनकी यादों के सहारे ही जी लेते
लेकिन दो पल दे कर साथ छोड़ जाते हैं
अब तो हर मोड़ पर.......
कल बैठकर साथ मेरे घंटों थे बातें करते
आज पल भर में मेरा हाथ छोड़ जाते हैं
वह सुबह शाम मिलना और खूब बातें करना
कुछ कसमों और बातों के साथ जीना मरना
तोड़कर मेरे सपने हर रात छोड़ जाते हैं
अब तो हर मोड़ पर.....
दिल की कोई बात उनसे कह नहीं पाते हैं
जीते नहीं हैं साथ तो क्यों मर नहीं जाते हैं
थोड़ी मुस्कुरा कर वो विश्वास तोड़ जाते हैं
अब तो हर मोड़ पर.........
हम भी उनसे मिलने की उम्मीद नहीं करते हैं
अपने साथ ही चलने की जिद नहीं करते हैं लेकिन..
उनसे मुलाकात कि एक आश छोड़ जाते हैं
अब तो हर मोड़ पर.....
उन की बगिया को हमने खुशी दे दिया
सूखे फूल पौधों को भी जिंदगी दे दिया
यश देख तेरा करके सत्यानाश छोड़ जाते हैं
हां यह सच है कि वो अब निराश छोड़ जाते हैं
© प्रवीन यश
कोईराजपुर, वाराणसी
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गुजरा हुआ पल एक ख्वाब होता चला गया
वह जितना दूर गया एक राज होता चला गया
मैं उसके बिना एक पल भी गुजारा नहीं
वह जब दूर गया तो मैं उदास होता चला गया
गुजरा हुआ पल.........
उसके साथ जीवन का हर पल गुजारना चाहता था उसके गम व खुशी को दिल में सवारना चाहता था
एक ख्वाहिश मेरे दिल की जो ख्वाब होता चला गया गुजरा हुआ पल.....
वह पास बैठ जाते मेरे दिल के दरवाजे पर
जैसे पहरा हो उनका मेरे हर एक इरादे पर
अश्क निकलने से से चेहरा बेदाग होता चला गया
गुजरा हुआ पल....
मैं सोचता था एक दिन वह मेरे हो जाएंगे
बिना उनके एक पल हम नहीं सो पाएंगे
दिल टूटा तो जर्रे-जर्रे से आवाज होता चला गया
गुजरा हुआ पल......
आप सुन ले में जहां से मोहब्बत की उम्मीद ना करना दिल लाख कोशिश करे लेकिन आप जिद ना करना
(और यदि मन न मानों तब)
देख लो तेरा यश कैसे बर्बाद होता चला गया
गुजरा हुआ पल एक ख्वाब होता चला गया।
© प्रवीन यश
कोईराजपुर, वाराणसी
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उन्हें मौका मिला होता तो क्या-क्या कर गए होते
मेरी तैरती हुई किस्ती भी डूबा कर गए होते
उन्हें मौका मिला होता तो क्या-क्या कर गए होते
मैं हंसता खेलता रहता था गुमसुम पड़ी राहों में
जाने आ गया कैसे उस शख्स के निगाहों में
लगाकर दिल सराफत से वो तन्हा कर गए होते
उन्हें मौका मिला होता तो क्या-क्या कर गए होते
मैंने उनसे मोहब्बत दिल से कर ली भूल थी मेरी
निगाहे दूर खुद मंजिल से कर ली भूल थी मेरी
मैं हंसता भी अगर तन्हा तो वो रुला कर गए होते
उन्हें मौका मिला होता तो क्या-क्या कर गए होते
गजब ए इश्क है साथी गजब इसमें मोहब्बत है
यश जिसको चाहता ज्यादा उसीके दिल में नफरत है
इन हंसती-खेलती आंखों में आंसू भर गए होते
उन्हें मौका मिला होता तो क्या-क्या कर गए होते
© प्रवीन यश
कोईराजपुर, वाराणसी
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कभी मिले तो दिल की आवाज कह दूं
जो दिल में छुपाया है वह राज कह दूं
कभी मिले तो दिल की आवाज कह दूं
वो मजलिस भरे सपने जो लगते थे अपने
एक तेरे ही प्यार में लग गए जिनको रंगने
जीवन के वो दिन और वो रात कह दूँ
कभी मिलो तो दिल की आवाज कह दूं
कितना अश्क गिरते हैं तन्हा अकेले में
हम अब तड़प रहे हैं गम के तबेले में
महसूस नहीं कर पाए वो एहसास कह दूं
कभी मिलो तो दिल की आवाज कह दूं
यश दुनिया के भीड़ में खो कर क्या मिला
ना मिली खुशियां कोई ठोकर बड़ा मिला
कुछ अच्छी-2 बातें कुछ खराब कह दूं
कभी मिलो तो दिल की आवाज कह दूं
© प्रवीन यश
कोईराजपुर, वाराणसी
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गरीबी की परिभाषा।
आज परिभाषा सुनकर आंसू बरस जाता होगा।
कभी सोचा है आपने गरीब क्या खाता होगा।
शाम की चिन्ता दिन में सुबह की चिन्ता रात में।
रोटी नमक मिलाकर खा लेता होगा साथ में।
टमाटर, प्याज खाने को वो तरस जाता होगा।
कभी सोचा है आपने गरीब क्या खाता होगा।।
ना बिस्तर मिलता होगा ना कोई खाट मिलती होगी।
उसको दर्द होता होगा जब भी रात मिलती होगी।
आसमा को ओढ़ता और धरती को बिछाता होगा।
कभी सोचा है आपने गरीब क्या खाता होगा।।
कड़ी मेहनत करके कुछ रूपये कमा लेता होगा।
कुछ रोटी दाल में तो कुछ का ब्याज चुका देता होगा।
दुख को खाकर अपने आंषुओं को पी जाता होगा।।
कभी सोचा है आपने गरीब क्या खाता होगा।।
© प्रवीन यश
कोईराजपुर, वाराणसी
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पिता जी के सर की ताज है बेटी हंसता हुआ एक समाज है बेटी लेकिन बेटी ऐसे नहीं हो सकती जैसे नजर आयी आज है बेटी पिता से है खतरा बता वो रह...