सोमवार, 14 अक्टूबर 2013


कलम के सिपाही आजाद हैं।

मीडिया में आज उपर बैठे गुरू घ्‍ांटाल हैं,
कोई कहता फ्राड तो कोई कहता दलाल है।
कुछ पत्रकारों पर हमें आज भी नाज है,
देखो दलालों कलम के सिपाही आजाद हैं।।

कुछ लोग मैनेज कराने का प्रयास करते हैं,
खबरों को हरदम दबाने का प्रयास करते हैं।
कुछ लोग लिख देते तो लग जाती आग है
देखो दलालों कलम के सिपाही आजाद हैं।।

ये कलम खिरी सांस तक ऐसे ही चलेती रहेंगी,
हमेशा अपने वाक्‍यों से आग लगलती रहेंगी।
मौत का भी गम नहीं अब हमारे पास हैं,
देखो दलालों कलम के सिपाही आजाद हैं।।

आज हमारा हर लेख तुमको चिढा रहा होगा,
जानता हू मैं कि तू भी मुझे गरिया रहा होगा।
जो निर्भिक पत्रकार हैं ‘यश‘ उनकी जिन्‍दाबाद है,
देखो दलालों कलम के सिपाही आजाद हैं।।

BY:-प्रवीन यादव 'यश'

बुधवार, 25 सितंबर 2013

सुन री...चिड़िया 
तू सुखी शाख पर 
बैठ बैठ क्या सोचे 
सब पत्ते झर गए पंछी
नयी नगरी को कूचे
तेरे मौसम की रीत नहीं
इस जग से विपरीत
नाम का सिक्का चल जाये 
तो काम को कौन पूछे 
------
---------मंजुषा पांडे


रविवार, 14 जुलाई 2013


तेरे अश्क को पकडें और अपने हाथ में रख लें
बस चले अगर मेरा तो ​तुमको साथ में रख लें।
तेरी खुश्बू तेरी चाहत को आस पास में रख लें
बस चले अगर मेरा तो तुमको साथ में रख लें।।
मेरी खुशी तुमको मिले मुझे मिल जाये तेरे गम
रोये मेरी आंखें तेरी आंखें अगर हो नम।
कोई देखे नहीं तुमको ऐसी लिबास में रख लें।
बस चले अगर मेरा तो तुमको साथ में रख लें।।



शनिवार, 26 जनवरी 2013



ये मोहब्‍बत में ऐसा क्‍यों होता है
आखे नम रहती है दिल रोता है।
ये मोहब्‍बत में ऐसा क्‍यों होता है।।

सोचा लेकिन कोई बात समझ नहीं पाया
धोखा हुआ राह में तो बच नहीं पाया
कोई जागता रात दिन कोई बेचैन सोता है।
ये मोहब्‍बत में क्‍यों ऐसा होता है।।

तोड कर दिल मेरा खुश हो रहे हैं वो
सोचता है दिल अभी भी रो रहे हैं वो
तोडना ही है दिल तो किसने उन्‍हें रोका है।
ये मोहब्‍बत में ऐसा क्‍यों होता है।

पागल बना दिया उनकी मोहब्‍बत ने
मर जाउगा शायद उनकी चाहत में
सोचता रात दिन क्‍यों धोखा होता है
ये मोहब्‍बत में ऐसा क्‍यों होता है।

आजा तेरा आज भी इन्‍तजार है मुझको
आजा केवल तेरा ही दीदार है मुझको
पूछता है दिल प्रवीन तू क्‍यों रोता है
प्‍यार में तो अक्‍सर धोखा होता है
हॉ कसम से प्‍यार में अक्‍सर धोखा होता है।
ऑखें भी नम रहती हैं और दिल रोता है।




क्‍यों छोड गये मुझको तनहा मेरे साथी
साथ में गम का है ये जहॉ मेरे साथी।
क्‍यों छोड गये मुझको तनहा मेरे साथी।।

तेरे एक मुश्‍कान पर मिट जाता मैं
तेरे खुशी के खातिर बिक जाता मैं।
फिर क्‍यों छोडकर चल दिये कहॉ मेरे साथी
क्‍यों छोड गये मुझको तनहा मेरे साथी।।

मेरे प्‍यार में कोई कमी नजर आ गयी
मेरी खुशी पाराई कोई और भा गयी।
अब तो रोने को ही है बचा मेरे साथी
साथ में गम का है ये जहॉ मेरे साथी।।

हर गलियॉ हर राहों में तुझको तलासता हू मैं
हर राह हर सफर में तेरा साथ चाहता हू मै। 
अब लौट जाओ मत लो मेरा इन्‍तहा मेरे साथी
साथ में गम का है ये जहॉ मेरे साथी।।

कभी मेरे भी राहों में खुशीयो की नजारें थी
कभी तनहा रहा करते तो दिन रात बहारें थी।
कहता प्रवीन अभी भी है कुछ तो  बचा मेरे साथी
अब लौट आओ मत लो मेरे इन्‍तहा मेरे साथी ।।

क्‍यों छोड गये मुझको तनहा मेरे साथी।
साथ में गम का है ये जहॉ मेरे साथी।।।


शुक्रवार, 25 जनवरी 2013



तेरे अश्‍कों को भी अपने आखों से बहना चाहता था
तेरे एक चाहत में हद से गुजर जाना चाहता था मै।
पर तू मुझे इस कबिल समझ नहीं पाया 
बस तेरी मोहब्‍बत में खुद को लुटाना चाहता था मैं।।




मुझे तेरा वो प्‍यार कभी मिल नहीं पायेगा अब 
क्‍यों बनी तुम गैर की दिल मुझको रूलायेगा अब ।
तू जो समझलो वो करो मै कैसे कर सकता मना
पर बात इतना मान लो दिल चैन ना पायेगा अब।।



     मरने के बाद भी मुझे वो बेवफा याद आयेगी

मेरे मरने के बाद भी मुझे वो बेवफा याद आयेगी
दिल को तोड दिया कैसे हर सजा याद आयेगी।।
मेरे मरने के बाद भी मुझे वो बेवफा याद आयेगी।।

कितना यकीन करता था उसकि हर बातों पर मैं।
उसने धोखा दिया मुझे तो था रोया रातों भर मैं।।
मेरे दिल भी जला देना वर्ना वफा याद आयेगी।
मेरे मरने के बाद भी मुझे वो बेवफा याद आयेगी।।

कितना हसरत से उससे मोहब्‍बत मैं करता रहा।
उसपर यकीन कर मैं हद से गुजरता रहा।।
दिल तोड कर मेरा कहो वो कैसे भाग जायेगी।
मेरे मरने के बाद भी मुझे वो बेवफा याद आयेगी

कितनी हसीन बातें कर लेती थी दिल लगाकर
सोचता हू उसे क्‍या मिला मेरा दिल दूखाकर।।
मेरी वफा भी तो एक दिन उसे सतायेगी।
मेरे मरने के बाद भी मुझे वो बेवफा याद आयेगी

कसम दिला देती थी पर यकीं नहीं होता था
सोचकर उसकि समझ मैं रात दिन रोता था।।
कोई भी तो बताओं वो कैसे साथ निभायेगी
हॉ यार कसम सच कहते हैं----------------------------------------
मेरे मरने के बाद भी मुझे वो बेवफा याद आयेगी।।।।

पागल प्रवीन

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