शनिवार, 26 जनवरी 2013



क्‍यों छोड गये मुझको तनहा मेरे साथी
साथ में गम का है ये जहॉ मेरे साथी।
क्‍यों छोड गये मुझको तनहा मेरे साथी।।

तेरे एक मुश्‍कान पर मिट जाता मैं
तेरे खुशी के खातिर बिक जाता मैं।
फिर क्‍यों छोडकर चल दिये कहॉ मेरे साथी
क्‍यों छोड गये मुझको तनहा मेरे साथी।।

मेरे प्‍यार में कोई कमी नजर आ गयी
मेरी खुशी पाराई कोई और भा गयी।
अब तो रोने को ही है बचा मेरे साथी
साथ में गम का है ये जहॉ मेरे साथी।।

हर गलियॉ हर राहों में तुझको तलासता हू मैं
हर राह हर सफर में तेरा साथ चाहता हू मै। 
अब लौट जाओ मत लो मेरा इन्‍तहा मेरे साथी
साथ में गम का है ये जहॉ मेरे साथी।।

कभी मेरे भी राहों में खुशीयो की नजारें थी
कभी तनहा रहा करते तो दिन रात बहारें थी।
कहता प्रवीन अभी भी है कुछ तो  बचा मेरे साथी
अब लौट आओ मत लो मेरे इन्‍तहा मेरे साथी ।।

क्‍यों छोड गये मुझको तनहा मेरे साथी।
साथ में गम का है ये जहॉ मेरे साथी।।।


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