बुधवार, 25 सितंबर 2013

सुन री...चिड़िया 
तू सुखी शाख पर 
बैठ बैठ क्या सोचे 
सब पत्ते झर गए पंछी
नयी नगरी को कूचे
तेरे मौसम की रीत नहीं
इस जग से विपरीत
नाम का सिक्का चल जाये 
तो काम को कौन पूछे 
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---------मंजुषा पांडे


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