मंगलवार, 25 दिसंबर 2012


चले जायेंगे तेरे जीवन से अन्जानों की तरह।
भुल जाना तुम भी मुझे बेगानों की तरह।।
मेरे मरने पर भी आंशु ना गिराना
मेरे मातम में आ जाना मेहमानों की तरह।।


जीवन में हर शक्स मुझे आजमाता रहा।
मैं हर राह में ठोकर खाता रहा।।
ना पता था वो भी छोड जायेंगे एक दिन।
जिनका हर सुख दूख में साथ निभाता रहा।।

गम की राहों से मेरी अर्थी निकल रही थी।
तुफान की लहरों पे सजकर चिता जल रही थी।।
ना जाने किस शक्स ने आकर रोशनी कर दी।
वर्ना बुझे चिरागों सी ये शाम–ए–जिन्दगी ढल रही थी।

वो जिन्दगी में आये हसीन पल की तरह।
लिख कर रख्र दिये हर खत गजल की तरह।।
हम क्या कहें अपने दिल की दास्तां यारों।
वो तो याद भी करते हैं तो गुजरे कल कि तरह।।



रविवार, 18 नवंबर 2012

हार मान लेने से अच्छा है प्रयास करें



शुक्रवार, 16 नवंबर 2012




वो पत्ती थी गुलाब की
मैं बूद था शराब का
वो मौसम सदाबहार थी
मैं पतझड़ का सबाब था।।
मैं कितना खराब, मैं कितना खराब था।।
वो फुलो सी हसती थी
मैं कांटों सा धसता था
वो प्यासे का कुंआ ​थी
मैं सुखा हुआ तालाब था
मैं कितना खराब था, मैं कितना खराब था।।
अब बदला मौसम पलभर में
सब बदल गया ​जीवन भर में
कितना टूटा दिल में मेरा
आखों में अश्कों का बरसात था
मैं कितना खराब था, मैं कितना खराब था।।
वो भुल गयी सूखे पत्तों सा
मै लटका भवरों के छत्तों सा
कहने को तो उस्ताद था
लेकिन हॉ यश मैं कितना खराब था क्या.....................
सचमुच मैं इतना खराब था।।



मेरे दिल से दूखी होकर मुझे भुलाए बैठे हैं
मेरे यादों की चिता जलाये बैठे हैं।
मुझे तो आज भी उनसे ही मोहब्बत है।
जाने क्यों वो मुह छुपाये बैठे हैं।।

वो आगे चलने के आदि हो गये
जाने कैसे हम साथी हो गये।
हम तो उन्हें आज भी याद करते हैं
और याद में उनके शराबी हो गये।।

उनकी यादों ने मुझे शराबी बना दिया
उनकी वफाओं ने मौसम गुलाबी बना दिया।
मै तो कभी शराब पीने की चाहत नहीं रखा
उनकी एक पल की बेवफाई ने पीने का आदि बना दिया।।

मुझे पता हे वो आज भी हमसे मोहब्बत करते हैं
भुलकर सारे गम वो इनायत करते हैं।।
हम तो चाहकर भी उन्हें नहीं समझ पाते
लेकिन वो तो रूठकर भी हमे समझा करते हैं।

सोमवार, 12 नवंबर 2012



कुछ पल के लिये


सोचता हू कुछ पल के लिये खामोश हो जाऊ मै।
धुधली हूई धूंध सी यादों में खो जाऊ मै। सोचता हू ................. खामोश हो जाऊ मै।
उनको देखता हू तो बोलने की चाहत जाग जाती है।
कोई अपना बड़ी दूरी है और उसकि याद आती है।।
उस अपने पन की यादों के आगोस में खो जाऊ मैं। सोचता हू ................. खामोश हो जाऊ मै।
लाख कस्में वो पल में दिला जाते हैं।
फिर कस्मों को कैसे भुला जाते हैं।।
आखें खुली हो और सपनों में खो जाऊ मैं। सोचता हू ................. खामोश हो जाऊ मै।
दर्द कितना है इस दिल में प्रवीन जानता है।
अस्क सूखे नहीं अभी वो रात दिन जानता है।।
छोड़कर ये दुनिया सरफरोश हो जाऊ मै। सोचता हू ................. खामोश हो जाऊ मै।
माता का प्यार तो बचपन से मिला मुझको।
बीबी का प्यार तो जीवन में मिला मुझकों।।
फटे आचल के टूकड़े में टूटकर सो जाऊ मैं। सोचता हू ................. खामोश हो जाऊ मै।




उनसे एक पल में ऐसे मोहब्बत हुई जिन्दगी जैसे मेरी बदल ही गई।
मै ना सोचा ना समझा कभी भुलकर ये सुलगती हुई आग जल ही गई।।
छूट जाये जहा तो भी गम ना रहे
अश्को से मेरी आखें भी नम ना रहें
चाहे चल जाये जीवन मेरा गम नहीं
मेरी चाहत पर कोई सितम ना रहे
अब दूखों और सुखों में हम कैसे हसें जब ये अश्कों की डोली निकल ही गई।
उनसे एक पल में ऐस मोहब्बत हूई जिन्दगी जैसे मेरी बदल ही गई।।
इस मोहब्बत में ऐसा करम हो गया
जैसे लगता है दिन रात कम हो गया
अब ये रोती हूई आखें हैं पूछती
हम मिले अखिर क्यों क्यों जनम हो गया

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कुछ नया सोचने की आदत है हममे। कुछ नया करने की फितरत है हममें।।
क्या पता तकदीर कल कहॉ ले जाये। यू आज ही में जीने की चाहत है हममें।।

मेरे पापुलर अल्फाज....