मंगलवार, 25 दिसंबर 2012


चले जायेंगे तेरे जीवन से अन्जानों की तरह।
भुल जाना तुम भी मुझे बेगानों की तरह।।
मेरे मरने पर भी आंशु ना गिराना
मेरे मातम में आ जाना मेहमानों की तरह।।


जीवन में हर शक्स मुझे आजमाता रहा।
मैं हर राह में ठोकर खाता रहा।।
ना पता था वो भी छोड जायेंगे एक दिन।
जिनका हर सुख दूख में साथ निभाता रहा।।

गम की राहों से मेरी अर्थी निकल रही थी।
तुफान की लहरों पे सजकर चिता जल रही थी।।
ना जाने किस शक्स ने आकर रोशनी कर दी।
वर्ना बुझे चिरागों सी ये शाम–ए–जिन्दगी ढल रही थी।

वो जिन्दगी में आये हसीन पल की तरह।
लिख कर रख्र दिये हर खत गजल की तरह।।
हम क्या कहें अपने दिल की दास्तां यारों।
वो तो याद भी करते हैं तो गुजरे कल कि तरह।।



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